पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी एक बार फिर सुर्खियों में आ गई हैं। इस बार चर्चा उनके सोशल मीडिया अकाउंट को लेकर हो रही है। ममता बनर्जी ने अपने एक्स प्रोफाइल का बायो बदल दिया है, जिसके बाद बंगाल की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। पहले जहां उनके बायो में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री लिखा था, वहीं अब उन्होंने खुद को 15वीं, 16वीं और 17वीं विधानसभा के दौरान मुख्यमंत्री बताया है।
नई लाइन ने बढ़ाया सस्पेंस
ममता बनर्जी ने अपने नए बायो में खुद को ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की फाउंडर चेयरपर्सन बताया है। इसके साथ उन्होंने मुख्यमंत्री शब्द के आगे पूर्व कार्यकाल का जिक्र किया है। राजनीतिक गलियारों में इस बदलाव को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ लोग इसे सत्ता से दूरी का संकेत मान रहे हैं तो कुछ इसे चुनावी विवाद और कानूनी लड़ाई से जोड़कर देख रहे हैं।
इस्तीफा देने से किया इनकार
चुनाव नतीजों के बाद ममता बनर्जी पहले ही साफ कर चुकी हैं कि वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी। उन्होंने चुनाव में धांधली और मतगणना में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। ममता का कहना है कि भाजपा ने चुनाव लूट लिया है और उनकी पार्टी इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाएगी। उन्होंने दावा किया कि कई सीटों पर चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष नहीं रही।
विधानसभा भंग होने के बाद भी अड़ीं
7 मई को पश्चिम बंगाल विधानसभा को राज्यपाल टी रवि ने भंग कर दिया था लेकिन इसके बाद भी ममता बनर्जी अपने रुख पर कायम दिखाई दे रही हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस की बैठक में ममता ने बेहद सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि पार्टी इस जनादेश का राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तर पर विरोध करेगी। तृणमूल नेताओं का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर पार्टी लगातार सबूत जुटा रही है।
राष्ट्रपति शासन पर भी बोलीं
बैठक के दौरान ममता बनर्जी ने कथित तौर पर कहा कि अगर केंद्र सरकार राष्ट्रपति शासन लगाना चाहती है तो लगा दे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उन्हें बर्खास्त करना है तो कर दिया जाए लेकिन यह दिन लोकतंत्र के लिए काला दिन माना जाएगा। ममता के इस बयान के बाद बंगाल की राजनीति और ज्यादा गर्म हो गई है। सोशल मीडिया पर भी उनके बयान और बदले हुए बायो को लेकर बहस तेज हो गई है।
बंगाल में जारी है सियासी संग्राम
पश्चिम बंगाल में चुनाव खत्म होने के बाद भी राजनीतिक तनाव कम होता दिखाई नहीं दे रहा। एक तरफ बीजेपी नई सरकार बनाने की तैयारी में जुटी है तो दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस चुनाव नतीजों को चुनौती देने की रणनीति बना रही है। ममता बनर्जी का बदला हुआ सोशल मीडिया बायो और इस्तीफा न देने वाला रुख साफ संकेत दे रहा है कि बंगाल की राजनीति में अभी सियासी संघर्ष लंबा चल सकता है।