बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी की हार के बाद अब समाजवादी पार्टी पूरी तरह सतर्क मोड में दिखाई दे रही है। माना जा रहा है कि अखिलेश यादव ने बंगाल के नतीजों से बड़ा राजनीतिक सबक लिया है। यही वजह है कि अब सपा 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर नई रणनीति बनाने में जुट गई है। पार्टी के भीतर लगातार बैठकों का दौर चल रहा है और खुद अखिलेश यादव बड़े नेताओं के साथ लगातार मंथन कर रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस बार सपा कोई भी जोखिम लेने के मूड में नहीं है।
पीडीए पर बढ़ी चिंता
लोकसभा चुनाव 2024 में पीडीए फॉर्मूले ने समाजवादी पार्टी को बड़ी ताकत दी थी। पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण की वजह से सपा ने बीजेपी को कई सीटों पर नुकसान पहुंचाया था। लेकिन बंगाल के नतीजों ने विपक्ष को साफ संदेश दिया कि सिर्फ जातीय समीकरणों के भरोसे चुनाव जीतना आसान नहीं है। बंगाल में ममता बनर्जी का मजबूत मुस्लिम और महिला वोट बैंक भी बीजेपी की रणनीति के सामने कमजोर पड़ गया। यही वजह है कि अब अखिलेश यादव नई सामाजिक रणनीति पर काम शुरू कर चुके हैं।
महिलाओं पर रहेगा फोकस
सूत्रों के मुताबिक समाजवादी पार्टी अब महिलाओं के बीच मजबूत पकड़ बनाने की तैयारी कर रही है। पार्टी को लगने लगा है कि आधी आबादी को साधे बिना सत्ता की लड़ाई आसान नहीं होगी। महिला सम्मेलन, गांव स्तर पर संपर्क अभियान और महिला नेताओं को ज्यादा जिम्मेदारी देने की तैयारी चल रही है। बंगाल में बीजेपी ने महिला सुरक्षा को बड़ा मुद्दा बनाया था और इसका असर चुनावी नतीजों में भी दिखाई दिया। अब सपा इसी मुद्दे पर अलग रणनीति तैयार कर रही है।
संगठन होगा फिर मजबूत
समाजवादी पार्टी अब बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने की योजना बना रही है। पुराने कार्यकर्ताओं को फिर से सक्रिय किया जा सकता है। जिलों में बड़े नेताओं के दौरे बढ़ाए जाने की तैयारी भी चल रही है। चर्चा यह भी है कि चाचा शिवपाल यादव समेत पुराने समाजवादी नेताओं के साथ लगातार बातचीत हो रही है ताकि पार्टी के भीतर किसी तरह की कमजोरी न रहे। सपा अब सिर्फ सोशल मीडिया नहीं बल्कि जमीन पर भी ताकत बढ़ाने की कोशिश में जुट गई है।
बीजेपी ने बढ़ाई आक्रामकता
उधर बीजेपी भी उत्तर प्रदेश 2027 को लेकर पूरी ताकत झोंकने के मूड में दिखाई दे रही है। बंगाल की जीत ने बीजेपी कार्यकर्ताओं का मनोबल और बढ़ा दिया है। योगी आदित्यनाथ और नरेंद्र मोदी को फिर सबसे बड़े चेहरे के तौर पर पेश किया जाएगा। बीजेपी कानून व्यवस्था, हिंदुत्व और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों को और आक्रामक तरीके से उठाने की तैयारी में है। ऐसे में उत्तर प्रदेश की सियासत अब और ज्यादा दिलचस्प होती दिखाई दे रही है।
2027 पर टिकी निगाहें
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2027 का चुनाव समाजवादी पार्टी के लिए करो या मरो जैसा होगा। अखिलेश यादव अब कोई गलती दोहराना नहीं चाहते। बंगाल चुनाव के बाद सपा पूरी रणनीति बदलने में जुट गई है। पार्टी हर वर्ग तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है और संगठन को नए तरीके से एक्टिव किया जा रहा है। अब देखना होगा कि नई रणनीति और बदले हुए सियासी समीकरणों के बीच 2027 में उत्तर प्रदेश की जनता किसे सत्ता की कुर्सी तक पहुंचाती है।