जिसने ममता को बनाया था मुख्यमंत्री उसी ने छीनी ‘सत्ता’, नंदीग्राम से शुरू हुए खेल ने बनाया इतिहास, शुभेंदु कैसे बने बंगाल की सत्ता के बादशाह, पढ़ें यहां

Suvendu Adhikari Bengal Political Rise

इस वक्त अब बंगाल से दिलली तक मुख्यमंत्री को लेकर चर्चा हो रही हैं, क्योंकि बंगाल की राजनीति में कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो सिर्फ चुनाव नहीं बल्कि इतिहास बन जाती हैं और इस बार की कहानी भी एक ऐसे ही चेहरे की है जिसने पहले ममता बनर्जी को शिखर तक पहुंचाया और फिर उसी शिखर को अपने दम पर हिला दिया. ये नाम किसी और का नहीं बल्कि शुभेंदु अधिकारीका है, ये एक ऐसा नाम है जो कभी ममता बनर्जी की ताकत माना जाता था, लेकिन आज वही नाम उनकी सबसे बड़ी चुनौती बन गया है.

कहानी की शुरुआत 2007 में हुई थी
2026 के चुनावी नतीजों ने ये साफ कर दिया कि बंगाल की सियासत अब पुराने ढर्रे पर नहीं चलने वाली, क्योंकि यहां एक नया चेहरा उभर चुका है जिसने सत्ता की पूरी दिशा बदल दी है. जिस पर अमित शाह पर पूरा भरोसा करते हैं, दरअसल इस कहानी की शुरुआत 2007 से होती है, जब नंदीग्राम में किसानों के आंदोलन ने पूरे देश का ध्यान खींचा था. उस वक्त जमीन अधिग्रहण के खिलाफ खड़े किसानों के बीच एक चेहरा सबसे आगे दिखाई दिया और वो शुभेंदु अधिकारी थे . जब हालात बिगड़े और गोली चली, तब भी वो पीछे नहीं हटे.

2020 में बीजेपी का दामन थामा
यही वो दौर था जिसने उन्हें जमीन से जुड़ा नेता बनाया. उन्होंने किसानों को संगठित किया, उनकी आवाज को मजबूत किया और उस आंदोलन ने बंगाल की राजनीति की नींव हिला दी. इसी आंदोलन के बाद ममता बनर्जी का कद भी तेजी से बढ़ा और 2011 में उन्होंने सत्ता हासिल की लेकिन सियासत में रिश्ते हमेशा एक जैसे नहीं रहते. समय बदला और वही शुभेंदु अधिकारी, जिन्होंने ममता बनर्जी को मजबूत किया था, धीरे-धीरे खुद को अलग महसूस करने लगे. पार्टी के अंदर बढ़ते बदलाव और नए समीकरणों के बीच उन्होंने बड़ा फैसला लिया और 2020 में बीजेपी का दामन थाम लिया. ये कदम सिर्फ एक दल बदल नहीं था, बल्कि बंगाल की राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हुआ. इसके बाद 2021 में उन्होंने नंदीग्राम से ममता बनर्जी को हराकर एक ऐसा संदेश दिया, जिसने पूरे देश को चौंका दिया.

नंदीग्राम से लेकर पूरे बंगाल तक प्रभाव दिखा
इसके बाद शुभेंदु अधिकारी विपक्ष के बड़े चेहरे के रूप में उभरे. उन्होंने लगातार सरकार पर सवाल उठाए, कानून व्यवस्था से लेकर दूसरे मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद की. धीरे-धीरे उनकी पहचान एक आक्रामक और जमीनी नेता के रूप में बनने लगी. यही वजह रही कि 2026 के चुनाव में वह बीजेपी के सबसे मजबूत चेहरों में गिने गए. इस बार उन्होंने सिर्फ चुनाव नहीं लड़ा, बल्कि पूरी रणनीति के साथ मैदान में उतरकर माहौल ही बदल दिया.

बंगाल में सरकार बनाने का रास्ता साफ
2026 के चुनावी नतीजों ने जो तस्वीर सामने रखी, वो पूरी तरह बदली हुई थी. बीजेपी ने बहुमत के आंकड़े को पार करते हुए बंगाल में सरकार बनाने का रास्ता साफ कर लिया. टीएमसी, जो लंबे समय से सत्ता में थी, वो इस बार पीछे रह गई. इस जीत के केंद्र में अगर किसी एक नाम की सबसे ज्यादा चर्चा हुई, तो वह शुभेंदु अधिकारी का ही था. नंदीग्राम से लेकर पूरे बंगाल तक उनका प्रभाव साफ दिखाई दिया और यही वजह रही कि उन्हें इस जीत का सबसे बड़ा चेहरा माना जा रहा है.

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