सुवेंदु अधिकारी बने बंगाल के नए नेता, बीजेपी विधायक दल ने लगाई मुहर, लेकिन वहीं क्यों, जानिए पीछे का कारण ?

Suvendu Adhikari Bengal BJP Leader

सुवेंदु अधिकारी को पश्चिम बंगाल बीजेपी विधायक दल का नेता चुन लिया गया है। कोलकाता में शुक्रवार शाम हुई बैठक में उनके नाम पर अंतिम मुहर लगी। बैठक में केंद्रीय पर्यवेक्षक के तौर पर अमित शाह और सह पर्यवेक्षक के रूप में मोहन चरण माझी मौजूद रहे। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने सुवेंदु के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे सभी विधायकों ने स्वीकार कर लिया। अब माना जा रहा है कि 9 मई को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में उनका शपथ ग्रहण हो सकता है।

भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद फैसला

पश्चिम बंगाल में पहली बार बीजेपी सरकार बनाने जा रही है। पार्टी ने 294 सीटों में से 207 सीटें जीतकर बड़ा राजनीतिक इतिहास रच दिया। इस चुनाव में टीएमसी के कई बड़े चेहरे हार गए। खुद ममता बनर्जी भवानीपुर सीट से चुनाव हार गईं। बीजेपी की इस जीत के बाद से ही सुवेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री पद की रेस में सबसे आगे माने जा रहे थे। हालांकि पार्टी के ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए नए चेहरे की चर्चा भी थी, लेकिन आखिरकार केंद्रीय नेतृत्व ने सुवेंदु पर भरोसा जताया।

ममता को दो बार हराने का फायदा

सुवेंदु अधिकारी की सबसे बड़ी ताकत ममता बनर्जी के खिलाफ लगातार दो बड़ी जीत मानी जा रही है। 2021 में उन्होंने नंदीग्राम में ममता को हराया था। इसके बाद इस बार भवानीपुर सीट पर भी उन्होंने टीएमसी सुप्रीमो को 15 हजार से ज्यादा वोटों से शिकस्त दी। बीजेपी नेताओं का मानना है कि बंगाल में टीएमसी के सबसे मजबूत चेहरे को हराने वाले नेता के रूप में सुवेंदु की छवि बेहद मजबूत हुई है। यही वजह रही कि पार्टी ने उन्हें मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे उपयुक्त चेहरा माना।

केंद्रीय नेतृत्व के भरोसेमंद नेता

सुवेंदु अधिकारी लंबे समय तक टीएमसी में रहे और नंदीग्राम आंदोलन के बड़े नेताओं में शामिल रहे। बीजेपी में आने के बाद वह पार्टी के सबसे आक्रामक हिंदुत्व चेहरों में गिने जाने लगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के साथ उनकी नजदीकी भी उनकी ताकत मानी जाती है। बंगाल में संगठन को मजबूत करने, स्थानीय समीकरण साधने और विपक्ष में रहते हुए ममता सरकार को लगातार घेरने में उनकी बड़ी भूमिका रही है।

क्षेत्रीय राजनीति में मजबूत पकड़

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि सुवेंदु अधिकारी को बंगाल की जमीनी राजनीति की गहरी समझ है। वह हिंदुत्व के साथ-साथ स्थानीय मुद्दों को भी मजबूती से उठाते रहे हैं। बीजेपी कैडर के बीच उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। पार्टी के अंदर उन्हें फ्रंटलाइन लीडर के तौर पर देखा जाता है। संकट की स्थिति में खुलकर सामने आने की उनकी शैली ने उन्हें अलग पहचान दी है।

अब शपथ ग्रहण पर नजर

सूत्रों के मुताबिक 9 मई को सुबह 10 बजे कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह हो सकता है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। बंगाल की राजनीति में यह बदलाव बेहद ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि पहली बार राज्य में बीजेपी अपने दम पर सरकार बनाने जा रही है।

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