पश्चिम एशिया संकट और बढ़ते ऊर्जा दबाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ईंधन बचाने की अपील की थी। अब उसी अपील को अमल में लाते हुए पीएम मोदी ने खुद अपने काफिले की गाड़ियों की संख्या कम कर दी है। बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी कैबिनेट बैठक के लिए अपने आवास से सिर्फ दो गाड़ियों के काफिले के साथ दफ्तर पहुंचे। इसका वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसकी खूब चर्चा हो रही है। सामान्य तौर पर प्रधानमंत्री के काफिले में बड़ी संख्या में सुरक्षा वाहन चलते हैं, लेकिन इस बार बेहद सीमित गाड़ियों के साथ उनका निकलना लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। इसे ऊर्जा बचत और सादगी का बड़ा संदेश माना जा रहा है।
ब्लू बुक में तय होती है सुरक्षा
प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए विशेष सुरक्षा समूह और ब्लू बुक के तहत सख्त नियम बनाए गए हैं। आमतौर पर पीएम के काफिले में 14 से 17 गाड़ियां शामिल रहती हैं। इसके अलावा राज्य पुलिस और स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों के वाहन भी साथ चलते हैं। कई बार कुल गाड़ियों की संख्या 30 से 40 तक पहुंच जाती है। लेकिन इस बार प्रधानमंत्री के काफिले में बेहद कम वाहन दिखाई दिए। बताया जा रहा है कि सुरक्षा से कोई समझौता किए बिना अतिरिक्त वाहनों को हटाया गया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में सिर्फ दो गाड़ियां नजर आ रही हैं, जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया है।
अमित शाह और राजनाथ ने भी घटाया काफिला
प्रधानमंत्री की अपील का असर अब केंद्रीय मंत्रियों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या घटाकर सिर्फ चार कर दी है। पहले उनके साथ करीब 11 गाड़ियां चलती थीं। गृह मंत्री अमित शाह भी कैबिनेट बैठक में केवल चार गाड़ियों के साथ पहुंचे। सामान्य परिस्थितियों में उनके काफिले में 11 से 12 वाहन शामिल रहते थे। बताया जा रहा है कि ऊर्जा बचत अभियान के तहत अब कई केंद्रीय मंत्री अपने काफिले को छोटा कर रहे हैं। सरकार के भीतर इसे प्रतीकात्मक लेकिन बड़ा कदम माना जा रहा है।
बीजेपी नेताओं ने भी अपनाई पहल
प्रधानमंत्री की इस पहल का असर बीजेपी संगठन में भी देखने को मिल रहा है। पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या कम करने की घोषणा की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि प्रधानमंत्री ने एक बार फिर खुद उदाहरण पेश कर दिखाया है कि वह सही मायनों में देश के प्रधानसेवक हैं। उन्होंने कहा कि जब नेतृत्व खुद बदलाव की शुरुआत करता है तो वह जनआंदोलन बन जाता है। बीजेपी के कई अन्य नेताओं और मंत्रियों ने भी अपने स्तर पर ऊर्जा बचत और सीमित संसाधनों के इस्तेमाल की बात कही है।
मुख्यमंत्रियों ने भी उठाए कदम
बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों पर भी प्रधानमंत्री की अपील का असर दिखाई देने लगा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक कर ईंधन बचत को लेकर कई निर्देश दिए हैं। इसके तहत सरकारी काफिलों में गाड़ियों की संख्या घटाने और वर्क फ्रॉम होम जैसी व्यवस्था को बढ़ावा देने की बात कही गई है। कई राज्यों में अधिकारियों को कारपूलिंग और सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल पर जोर देने को कहा गया है। सरकार का उद्देश्य तेल की खपत को कम करना और ऊर्जा संकट के प्रभाव को सीमित रखना बताया जा रहा है।
ऊर्जा बचत बना बड़ा संदेश
प्रधानमंत्री मोदी लगातार जनता से पेट्रोल-डीजल की बचत, सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल और कारपूलिंग को बढ़ावा देने की अपील कर रहे हैं। उन्होंने सरकारी और निजी दफ्तरों में वर्चुअल मीटिंग और वर्क फ्रॉम होम को भी प्राथमिकता देने की बात कही है। अब जब खुद प्रधानमंत्री और बड़े मंत्री अपने काफिले छोटे कर रहे हैं तो इसे जनता के लिए भी एक बड़ा संदेश माना जा रहा है। सोशल मीडिया पर लोग इसे सादगी और जिम्मेदारी की मिसाल बता रहे हैं। आने वाले दिनों में ऊर्जा बचत को लेकर सरकार की ओर से और भी कई बड़े कदम उठाए जा सकते हैं।