कभी-कभी कुछ ऐसे मामले हो जाते हैं जिसकी टाइमिंग पर सवाल खड़े होते हैं, कुछ ऐसा हुआ है इस बार भी, क्योंकि अंबेडकर जयंती के भंडारे में समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को पूड़ी खिलाने के बाद चर्चा में आए कर्मचारी उमेश कुमार का मामला अब और ज्यादा सियासी रंग लेता दिखाई दे रहा है। शुक्रवार को उनकी बेटी अंजलि मैसी लखनऊ स्थित सपा कार्यालय पहुंचीं और अखिलेश यादव से मुलाकात की। इस दौरान अंजलि की एक बात ने पूरे मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया।
अंजलि की वायरल लाइन
सपा कार्यालय में मुलाकात के दौरान अंजलि मैसी ने अखिलेश यादव से कहा कि सर आपके लिए ऐसी 100 नौकरियां भी कुर्बान हैं। पापा ने यही संदेश देकर मुझे भेजा है। अंजलि की यह बात सुनने के बाद अखिलेश यादव ने भरोसा दिलाया कि वह इस मामले में अधिकारियों से बात करेंगे। मुलाकात के बाद अंजलि का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा।
क्या है पूरा मामला
दरअसल 14 अप्रैल को बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर जयंती के मौके पर भंडारे का आयोजन किया गया था। इसी दौरान अंजलि मैसी ने अखिलेश यादव को प्रसाद के रूप में पूड़ी खिलाई थी। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। कुछ समय बाद उमेश कुमार को सुरक्षा निगरानी की ड्यूटी से हटाकर दोबारा सफाई कार्य में लगा दिया गया। परिवार ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई जानबूझकर की गई है।
परिवार ने लगाए आरोप
उमेश कुमार का कहना है कि अक्टूबर 2023 से उन्हें प्रतिष्ठानों की सुरक्षा निगरानी की जिम्मेदारी दी गई थी लेकिन वीडियो वायरल होने के बाद अचानक उन्हें हटा दिया गया। परिवार का आरोप है कि सिर्फ अखिलेश यादव को भंडारे का प्रसाद खिलाने की वजह से उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। उनका कहना है कि पूरे मामले को राजनीतिक रूप दे दिया गया है।
प्रशासन ने क्या कहा
वहीं छावनी परिषद प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज किया है। मुख्य अधिशासी अधिकारी अभिषेक राठौर का कहना है कि उमेश कुमार मूल रूप से सफाई कर्मचारी हैं और यह सिर्फ सामान्य प्रशासनिक बदलाव है। प्रशासन का दावा है कि उमेश कुमार के खिलाफ पहले से शिकायतें लंबित थीं और उन्होंने कार्यक्रम को लेकर रक्षा मंत्रालय सहित सैन्य अधिकारियों को सीधे पत्र भेजे थे जो सेवा नियमों के खिलाफ माना गया।
सियासत तेज हुई
इस पूरे मामले को लेकर अखिलेश यादव लगातार भाजपा सरकार पर हमला बोल रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पीडीए समाज के एक परिवार को सिर्फ इसलिए परेशान किया जा रहा है क्योंकि उन्होंने अंबेडकर जयंती पर उन्हें भोजन कराया था। अब अंजलि मैसी के भावुक बयान के बाद यह मामला और ज्यादा राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है। यूपी की राजनीति में अब यह मुद्दा सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई नहीं बल्कि सम्मान और राजनीतिक प्रतिशोध की बहस बनता दिखाई दे रहा है।