ममता के इस्तीफा न देने वाले ऐलान से बंगाल में बढ़ा सियासी संकट, अब बीजेपी सरकार गठन को लेकर उलझन में

Mamata Banerjee Resignation Political Crisis

बंगाल चुनाव में भारी जीत के बाद बीजेपी को लग रहा था कि सरकार गठन की प्रक्रिया आसान रहने वाली है। लेकिन तभी ममता बनर्जी के एक बयान ने पूरे राजनीतिक माहौल को बदल दिया। ममता बनर्जी ने साफ कहा कि वह इस्तीफा नहीं देंगी। इसी बयान के बाद बंगाल की राजनीति में नया विवाद शुरू हो गया है।

सीटों ने तस्वीर बदली
चुनावी नतीजों में बीजेपी को बड़ी बढ़त मिली है। आंकड़ों के मुताबिक बीजेपी 207 सीटों के साथ सरकार बनाने की स्थिति में पहुंच चुकी है जबकि टीएमसी सिर्फ 80 सीटों पर सिमट गई। इतना ही नहीं ममता बनर्जी अपनी सीट भी हार चुकी हैं। आमतौर पर ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री राज्यपाल को इस्तीफा सौंप देता है। लेकिन इस बार मामला उलझ गया है।

ममता ने बढ़ाई हलचल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता बनर्जी ने कहा कि नैतिक जीत उनकी हुई है। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाए। इसके साथ ही उन्होंने साफ कर दिया कि वह इस्तीफा नहीं देंगी। इसी बयान के बाद चर्चा तेज हो गई कि अगर कोई मुख्यमंत्री इस्तीफा देने से इनकार कर दे तो आगे क्या होगा। अब पूरा मामला संवैधानिक प्रक्रिया पर टिक गया है।

संविधान क्या कहता है
संविधान के जानकारों का कहना है कि सरकार सिर्फ बयान से नहीं बल्कि बहुमत से चलती है। अनुच्छेद 164 के तहत मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं। अगर किसी सरकार के पास बहुमत नहीं बचता तो राज्यपाल बहुमत परीक्षण करा सकते हैं। अगर सरकार सदन में बहुमत साबित नहीं कर पाती तो मुख्यमंत्री को पद छोड़ना पड़ता है।

राजभवन पर बढ़ीं नजरें
राजनीतिक चर्चाओं के मुताबिक राज्यपाल बड़ा फैसला ले सकते हैं। चर्चा है कि बहुमत परीक्षण की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। अगर टीएमसी बहुमत साबित नहीं कर पाती तो बीजेपी सरकार गठन का दावा पेश कर सकती है। कुछ जानकार मान रहे हैं कि संवैधानिक संकट बढ़ने पर राष्ट्रपति शासन की चर्चा भी तेज हो सकती है।

शपथ ग्रहण पर संशय
इधर बीजेपी खेमे में भी हलचल बढ़ती जा रही है। पार्टी 9 मई को शपथ ग्रहण की तैयारी में जुट चुकी थी। लेकिन ममता बनर्जी के इस्तीफा न देने वाले बयान ने पूरे समीकरण को बदल दिया है। अब सबकी नजर राजभवन पर टिक गई है। आने वाले दिनों में क्या बहुमत परीक्षण होगा, क्या नई सरकार बनेगी या मामला अदालत तक पहुंचेगा, यही अब बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा सवाल बन चुका है। अब बंगाल की सियासत में हर कदम पर देशभर की नजरें टिक चुकी हैं लगातार फिलहाल।

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