ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। लगातार दूसरे दिन बाजार में बिकवाली का दबाव इतना बढ़ा कि निवेशकों के करीब 11 लाख करोड़ रुपये साफ हो गए। बीएसई सेंसेक्स लगभग 1500 अंक टूटकर बंद हुआ जबकि निफ्टी में भी 400 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। बाजार की इस तेज कमजोरी ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है।
आईटी सेक्टर सबसे ज्यादा टूटा
इस गिरावट का सबसे ज्यादा असर आईटी सेक्टर पर दिखाई दिया। निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 3.50 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ। टीसीएस टेक महिंद्रा और एचसीएल जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों में तेज बिकवाली हुई। विशेषज्ञों के मुताबिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी नई वैश्विक घोषणाओं के कारण निवेशकों में चिंता बढ़ी है। इसके अलावा विदेशी बाजारों में आईटी कंपनियों पर दबाव का असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखाई दिया।
सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट
बीएसई सेंसेक्स 1456 अंक टूटकर 74559 के स्तर पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 436 अंक गिरकर 23380 पर पहुंच गया। निफ्टी बैंक में भी करीब 884 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली का दबाव बना रहा। निफ्टी स्मॉलकैप 100 और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली। बाजार में चौतरफा कमजोरी के कारण निवेशकों का भरोसा लगातार कमजोर पड़ता दिखाई दिया।
कच्चे तेल ने बढ़ाई चिंता
ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 106 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय बाजार के लिए चिंता का बड़ा कारण मानी जा रही हैं क्योंकि इससे महंगाई और आयात बिल दोनों बढ़ सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर होर्मुज क्षेत्र में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है। इसका सीधा असर कंपनियों की कमाई और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
पीएम मोदी की अपील का असर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से ईंधन बचाने और एक साल तक सोना न खरीदने की अपील का असर भी बाजार में दिखाई दिया। ज्वेलरी और रियल एस्टेट कंपनियों के शेयरों में लगातार दूसरे दिन गिरावट रही। निवेशकों को डर है कि अगर ऊर्जा संकट और बढ़ा तो मांग और खपत पर असर पड़ सकता है। इसी कारण बाजार में कई सेक्टरों में बिकवाली का दबाव और ज्यादा बढ़ गया।
आगे क्या होगा
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार की दिशा पूरी तरह वैश्विक घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। अगर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम नहीं हुआ तो बाजार में उतार चढ़ाव और बढ़ सकता है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने और जल्दबाजी में फैसले न लेने की सलाह दी जा रही है। अब सभी की नजर आने वाले दिनों में वैश्विक हालात और भारतीय बाजार की अगली चाल पर टिकी हुई है।