केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए विकसित भारत रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन ग्रामीण यानी वीबी-जी रैम-जी एक्ट लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है। यह नया कानून 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू होगा। इसके लागू होने के बाद मौजूदा मनरेगा व्यवस्था की जगह नई प्रणाली काम करेगी। सरकार का दावा है कि यह योजना सिर्फ मजदूरी तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि गांवों में स्थायी विकास और आजीविका बढ़ाने पर भी फोकस करेगी। इस फैसले के बाद देशभर में नई चर्चा शुरू हो गई है।
अब 125 दिन मिलेगा रोजगार
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के मुताबिक नए कानून के तहत ग्रामीण परिवारों को हर साल 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाएगी। अभी तक मनरेगा के तहत 100 दिन रोजगार मिलता था। केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह योजना ग्रामीण भारत के लिए नई शुरुआत साबित होगी। सरकार का मानना है कि इससे गांवों में रोजगार के साथ-साथ स्थानीय विकास को भी बड़ी रफ्तार मिलेगी। नई योजना को विकसित गांव मिशन से भी जोड़ा गया है।
किन कामों पर रहेगा फोकस
नई योजना के तहत जल संरक्षण परियोजनाएं ग्रामीण सड़कें पुल पुलिया स्कूल भवन आंगनवाड़ी केंद्र और कृषि से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया जाएगा। इसके अलावा स्वयं सहायता समूह और किसान उत्पादक संगठनों के लिए कार्यस्थल और शेड जैसी परिसंपत्तियां भी बनाई जाएंगी। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रिटेनिंग वॉल और आपदा रोकने वाली संरचनाओं को भी इस योजना में शामिल किया गया है। सरकार का कहना है कि गांवों में सिर्फ अस्थायी रोजगार नहीं बल्कि स्थायी संसाधन तैयार किए जाएंगे ताकि लंबे समय तक फायदा मिलता रहे।
सरकार ने बढ़ाया बजट
सरकार ने इस योजना के लिए बड़े बजट का भी ऐलान किया है। केंद्र सरकार ने 95 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का प्रावधान किया है। राज्यों की हिस्सेदारी जोड़ने पर कुल वार्षिक खर्च 1.51 ट्रिलियन रुपये से ज्यादा रहने का अनुमान है। सरकार का कहना है कि इस मिशन से गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे। प्रशासनिक खर्च की सीमा भी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत कर दी गई है ताकि फील्ड स्टाफ को बेहतर संसाधन और समय पर वेतन मिल सके।
मजदूरी भुगतान पर बड़ा दावा
नई योजना में मजदूरों के भुगतान को लेकर भी बड़ा बदलाव किया गया है। मजदूरी सीधे बैंक और डाकघर खातों में डीबीटी के जरिए भेजी जाएगी। सरकार ने तीन दिन के भीतर भुगतान करने का लक्ष्य तय किया है जबकि अधिकतम सीमा 15 दिन रखी गई है। अगर मजदूरी देने में देरी होती है तो मजदूरों को मुआवजा मिलेगा। वहीं मांग के बावजूद रोजगार नहीं मिलने पर बेरोजगारी भत्ता देने का भी प्रावधान रखा गया है।
संक्रमण काल में क्या होगा
सरकार ने साफ किया है कि मनरेगा के तहत पहले से चल रहे सभी काम जारी रहेंगे और अधूरे प्रोजेक्ट 1 जुलाई तक पूरे किए जाएंगे। राज्यों को नई व्यवस्था लागू करने के लिए छह महीने का समय दिया गया है। हालांकि जुलाई के बाद ग्रामीण रोजगार से जुड़ी फंडिंग सिर्फ नए वीबी-जी रैम-जी फ्रेमवर्क के तहत जारी होगी। सरकार का दावा है कि यह मिशन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत और विकसित गांव विजन को नई मजबूती देगा।