एलपीजी डिलीवरी के नए नियम पर विवाद, ओटीपी सिस्टम के खिलाफ हाई कोर्ट पहुंचा मामला

LPG OTP Delivery Rule

घरेलू एलपीजी सिलेंडर डिलीवरी में लागू किए गए नए डिजिटल सिस्टम को लेकर अब विवाद गहराता जा रहा है। मामला बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच तक पहुंच गया है। अदालत ने केंद्र सरकार और तेल कंपनियों से जवाब मांगा है। याचिका में मांग की गई है कि डिजिटल ओटीपी आधारित सिस्टम के साथ-साथ पुरानी ऑफलाइन बुकिंग व्यवस्था भी जारी रखी जाए। एलपीजी वितरक संघ का कहना है कि पूरी तरह डिजिटल व्यवस्था लागू होने से ग्राहकों और वितरकों दोनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

क्या है नया DAC सिस्टम

तेल कंपनियों ने घरेलू गैस सिलेंडर की डिलीवरी के लिए डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड यानी DAC सिस्टम लागू किया है। इस सिस्टम के तहत सिलेंडर डिलीवरी के समय ग्राहक के मोबाइल पर एक ओटीपी भेजा जाता है। ग्राहक द्वारा ओटीपी बताने के बाद ही डिलीवरी पूरी मानी जाती है। शुरुआत में यह व्यवस्था सिर्फ 50 प्रतिशत डिलीवरी पर लागू थी लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 95 प्रतिशत कर दिया गया। इसके बाद 4 अप्रैल 2026 को इसे पूरी तरह अनिवार्य बना दिया गया।

वितरकों ने क्या जताई चिंता

एलपीजी वितरक संघ के अध्यक्ष जयप्रकाश तिवारी की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि नया सिस्टम जमीनी स्तर पर कई मुश्किलें पैदा कर रहा है। संघ का कहना है कि हर ग्राहक के पास मोबाइल फोन नहीं होता। कई बुजुर्ग और ग्रामीण लोग ओटीपी प्रक्रिया समझ नहीं पाते। गांवों में नेटवर्क की दिक्कत के कारण समय पर ओटीपी नहीं पहुंचता। इसके अलावा सर्वर और वेबसाइट की तकनीकी खराबी की वजह से भी डिलीवरी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। इससे कई बार गैस सिलेंडर की सप्लाई रुक जाती है या काफी देर हो जाती है।

ब्लैकआउट अवधि का भी जिक्र

याचिका में 8 मार्च से 17 मार्च के बीच आई तकनीकी दिक्कतों का भी उल्लेख किया गया है। वितरक संघ ने इसे ब्लैकआउट अवधि बताया है। दावा किया गया कि इस दौरान ऑनलाइन रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में बड़ा अंतर देखने को मिला। कई जगह बुकिंग और डिलीवरी डेटा सही तरीके से अपडेट नहीं हो पाया। इसकी वजह से सिलेंडर वितरण प्रक्रिया बाधित हुई और ग्राहकों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। वितरकों का कहना है कि ऐसी स्थिति में पूरी तरह डिजिटल व्यवस्था भरोसेमंद नहीं मानी जा सकती।

हाई कोर्ट ने क्या कहा

मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की खंडपीठ ने केंद्र सरकार और तेल कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे तीन हफ्ते के भीतर इस मामले पर जवाब दें। अदालत ने याचिका पर गंभीरता दिखाई है और दोनों पक्षों से विस्तृत जानकारी मांगी है। फिलहाल इस मामले पर अंतिम फैसला आना बाकी है लेकिन अदालत के दखल के बाद अब यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है।

संघ की क्या है मांग

एलपीजी वितरक संघ का कहना है कि डिजिटल प्रमाणीकरण व्यवस्था जारी रखी जा सकती है लेकिन ऑफलाइन बुकिंग का विकल्प भी बंद नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि जरूरत पड़ने पर ग्राहक सीधे एजेंसी से सिलेंडर ले सकें। वितरकों का मानना है कि पूरी तरह डिजिटल सिस्टम लागू करने से ग्रामीण और तकनीकी रूप से कमजोर लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी होगी। अब सभी की नजर अदालत और सरकार के अगले फैसले पर टिकी हुई है।

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