आज के समय में मोबाइल फोन लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। फोन और इंटरनेट ने लोगों को जोड़ना आसान बना दिया है लेकिन इसके साथ फोन पर गाली-गलौज, धमकी और मानसिक परेशान करने के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। कई लोग बार-बार कॉल करके डराने, अपमानित करने या धमकाने की कोशिश करते हैं। ऐसे मामलों को अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन कानून इन्हें गंभीर अपराध मानता है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान भी देता है।
धमकी देना कानूनन अपराध
अगर कोई व्यक्ति फोन पर जान से मारने या नुकसान पहुंचाने की धमकी देता है तो यह सीधा आपराधिक मामला माना जाता है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 351 और 352 के तहत ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज की जा सकती है। पहले यही प्रावधान IPC की धारा 503 और 506 में शामिल था। पुलिस शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच करती है और जरूरत पड़ने पर आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की जाती है।
फोन पर गाली देना भी अपराध
कानून सिर्फ धमकी को ही नहीं बल्कि फोन पर गाली देने और जानबूझकर अपमान करने को भी अपराध मानता है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 356 के तहत अगर कोई व्यक्ति आपको उकसाने या मानसिक रूप से परेशान करने की नीयत से अपमान करता है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है। पहले यह प्रावधान IPC की धारा 504 के अंतर्गत आता था। लगातार अपमानजनक कॉल और मैसेज करना मानसिक उत्पीड़न की श्रेणी में माना जाता है।
बार-बार कॉल करना स्टॉकिंग
अगर कोई व्यक्ति लगातार कॉल या मैसेज करके किसी को परेशान करता है तो इसे स्टॉकिंग माना जा सकता है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 354D के तहत यह गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। खासकर महिलाओं को परेशान करने वाले मामलों में पुलिस सख्त कार्रवाई कर सकती है। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में समय रहते शिकायत करना बेहद जरूरी होता है ताकि आरोपी के खिलाफ तुरंत कदम उठाए जा सकें।
सबूत संभालकर रखना जरूरी
ऐसे मामलों में सबसे अहम बात सबूत इकट्ठा करना माना जाता है। अगर कोई फोन पर गाली देता है या धमकी देता है तो कॉल रिकॉर्डिंग, कॉल लॉग, स्क्रीनशॉट और चैट को सुरक्षित रखना जरूरी है। यही सबूत पुलिस जांच के दौरान सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बिना सबूत के कई बार कानूनी कार्रवाई मुश्किल हो जाती है इसलिए हर रिकॉर्ड संभालकर रखना चाहिए।
ऐसे करें शिकायत
अगर कोई लगातार फोन करके परेशान कर रहा है तो सबसे पहले जरूरी सबूत सुरक्षित करें और फिर उस नंबर को ब्लॉक कर दें। इसके बाद नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। जरूरत पड़ने पर महिला हेल्पलाइन और ऑनलाइन शिकायत पोर्टल का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। कानूनी जानकारों का कहना है कि ऐसे मामलों में डरने के बजाय तुरंत कार्रवाई करना ही सबसे सही कदम माना जाता है।