अक्सर माना जाता है कि डायबिटीज के मरीजों को फल नहीं खाने चाहिए, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। एक्सपर्ट के अनुसार फल शरीर के लिए जरूरी पोषण, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट देते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि कौन सा फल, कितनी मात्रा में और किस तरीके से खाया जा रहा है। सही चुनाव करने से डायबिटीज मरीज भी फलों का फायदा ले सकते हैं।
ग्लाइसेमिक इंडेक्स का रखें ध्यान
डायबिटीज मरीजों के लिए किसी भी फल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स काफी अहम माना जाता है। जिन फलों का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, वे धीरे-धीरे शुगर रिलीज करते हैं और ब्लड शुगर तेजी से नहीं बढ़ाते। आम तौर पर 55 से कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फल ज्यादा सुरक्षित माने जाते हैं। फाइबर वाले फल शरीर में ग्लूकोज को धीरे अवशोषित होने में मदद करते हैं।
इन फलों से रखें दूरी
कुछ फल ऐसे हैं जिनमें प्राकृतिक शुगर ज्यादा होती है। एक्सपर्ट के मुताबिक आम, केला, चीकू, अंगूर और शरीफा जैसे फलों का सेवन सीमित रखना चाहिए। इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज्यादा हो सकता है, जिससे ब्लड शुगर अचानक बढ़ने की आशंका रहती है। खासकर जूस या शेक के रूप में इनका सेवन और ज्यादा असर डाल सकता है।
ये फल बेहतर विकल्प माने जाते हैं
डायबिटीज मरीजों के लिए सेब, अमरूद, संतरा, नाशपाती और बेरीज बेहतर विकल्प माने जाते हैं। इन फलों में फाइबर ज्यादा होता है और ये ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाने का खतरा कम करते हैं। हालांकि इनका सेवन भी संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए। आमतौर पर दिन में 1 से 2 सर्विंग पर्याप्त मानी जाती है।
जूस नहीं, सीधे फल खाएं
एक्सपर्ट मानते हैं कि फलों को जूस, स्मूदी या मिल्कशेक की बजाय सीधे खाना ज्यादा फायदेमंद होता है। जूस बनाने पर फाइबर कम हो जाता है और शुगर तेजी से शरीर में पहुंचती है। बेहतर होगा कि फलों को मिड मील या स्नैक्स की तरह खाया जाए और उन्हें प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों के साथ लिया जाए।
ड्रायफ्रूट और ताजे फल में फर्क समझें
ताजे फलों की तुलना में ड्रायफ्रूट्स में शुगर ज्यादा केंद्रित हो जाती है। खजूर और सूखे अंजीर जैसे विकल्प कम मात्रा में भी ज्यादा कैलोरी और शुगर दे सकते हैं। इसलिए डायबिटीज मरीजों के लिए ताजे फल ज्यादा सुरक्षित और बेहतर विकल्प माने जाते हैं। किसी भी बदलाव से पहले अपनी जरूरत और शरीर की स्थिति के अनुसार एक्सपर्ट की सलाह लेना जरूरी है।







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