1 जून से बदल गए कई बड़े नियम! UPI से LPG तक असर, जानिए आपकी जेब पर कितना पड़ेगा प्रभाव

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1 जून से यूपीआई भुगतान व्यवस्था में बड़ा बदलाव लागू हो गया है। अब जब भी कोई व्यक्ति यूपीआई के जरिए पैसे भेजेगा, उसे सामने वाले व्यक्ति का बैंक में दर्ज वास्तविक नाम दिखाई देगा। पहले कई मामलों में केवल यूपीआई आईडी या निकनेम दिखता था, जिससे धोखाधड़ी की आशंका बनी रहती थी। नए नियम का उद्देश्य ऑनलाइन भुगतान को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है। इससे गलत खाते में पैसे भेजने और फर्जी पहचान वाले मामलों पर रोक लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

महंगा हुआ कॉमर्शियल गैस सिलेंडर

जून की शुरुआत के साथ ही होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को झटका लगा है। 19 किलो वाले कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 42 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है। नई दरों के अनुसार दिल्ली में इसकी कीमत 3,113.50 रुपये हो गई है। माना जा रहा है कि इसका असर छोटे कारोबारियों और खाद्य व्यवसाय से जुड़े लोगों पर पड़ सकता है। हालांकि घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।

पैन कार्ड और नकद लेन-देन के नियम बदले

सरकार ने पैन कार्ड से जुड़े कुछ नियमों में भी बदलाव किया है। अब एक दिन में 50 हजार रुपये से अधिक नकद जमा करने पर पैन देना अनिवार्य नहीं रहेगा। वहीं प्रॉपर्टी खरीद और बिक्री में पैन की सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी गई है। इसके अलावा सालभर में 10 लाख रुपये से अधिक नकद निकासी पर पैन रिपोर्टिंग का नियम लागू रहेगा। इन बदलावों का उद्देश्य लेन-देन प्रक्रिया को आसान बनाना बताया जा रहा है।

सोलर और पेट्रोल-डीजल से जुड़े फैसले

1 जून से सोलर क्षेत्र में भी नए नियम लागू हो गए हैं। अब सरकारी योजनाओं और सब्सिडी वाले सौर परियोजनाओं में केवल उन्हीं सोलर मॉड्यूल और सेल का उपयोग किया जा सकेगा जो सरकार की स्वीकृत सूची में शामिल होंगे। दूसरी ओर केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में कटौती की है। नई दरें आज से प्रभावी हो गई हैं, जिससे ऊर्जा क्षेत्र में कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

भारत-ओमान व्यापार को मिलेगा बढ़ावा

आज से भारत और ओमान के बीच मुक्त व्यापार समझौते से जुड़े नए प्रावधान भी लागू हो गए हैं। सरकार का मानना है कि इससे दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के अवसर बढ़ेंगे। कुल मिलाकर जून महीने की शुरुआत कई महत्वपूर्ण आर्थिक और प्रशासनिक बदलावों के साथ हुई है। इन नए नियमों का असर आम उपभोक्ताओं से लेकर कारोबारियों और निवेशकों तक सभी पर देखने को मिल सकता है।

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