आज के दौर में मोबाइल फोन लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। कई लोग खाना खाते समय, यात्रा के दौरान और यहां तक कि बाथरूम में भी मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं। इसी आदत को लेकर एक युवक ने संत प्रेमानंद जी महाराज से सवाल किया कि क्या बाथरूम में फोन ले जाकर उनके प्रवचन या सत्संग सुने जा सकते हैं? इस सवाल का जवाब अब चर्चा का विषय बना हुआ है।
प्रेमानंद महाराज ने क्या कहा?
एकांतिक वार्ता के दौरान प्रेमानंद जी महाराज ने इस सवाल का जवाब देते हुए कहा कि बाथरूम में फोन ले जाना गलत नहीं है, लेकिन वहां उसका उपयोग करने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति सत्संग या प्रवचन सुनना चाहता है तो फोन को पहले से चलाकर किसी ऊंची जगह पर रख सकता है। हालांकि बार-बार फोन को हाथ लगाने या इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। उनके अनुसार पवित्रता और अनुशासन का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
शौच के दौरान मोबाइल पर जताई चिंता
महाराज ने यह भी कहा कि आजकल कई लोग शौच के समय भी मोबाइल का लगातार उपयोग करते रहते हैं, जो उचित नहीं माना जा सकता। उनका मानना है कि व्यक्ति को ऐसे समय अपना पूरा ध्यान आवश्यक कार्य पर रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि मोबाइल का अत्यधिक उपयोग न केवल आदत को खराब करता है बल्कि मानसिक एकाग्रता को भी प्रभावित कर सकता है।
पवित्रता और व्यवहार का संदेश
प्रेमानंद महाराज के अनुसार मोबाइल ऐसी वस्तु है जो हर जगह साथ रहती है, इसलिए उसके उपयोग में पवित्रता और मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति छोटी-छोटी बातों में भी अनुशासन रखता है तो उसका मन और बुद्धि अधिक शुद्ध रहती है। यही कारण है कि उन्होंने फोन को छूने और इस्तेमाल करने के बीच भी सावधानी बरतने की सलाह दी।
फिलहाल बंद हैं पदयात्रा दर्शन
इस बीच प्रेमानंद महाराज के भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी भी सामने आई है। स्वास्थ्य संबंधी कारणों से उनकी प्रसिद्ध पदयात्रा फिलहाल बंद कर दी गई है। पहले वे अपने निवास से पैदल आश्रम तक जाते थे और रास्ते में भक्त उनके दर्शन करते थे। अब स्वास्थ्य को देखते हुए यह व्यवस्था अस्थायी रूप से रोक दी गई है।
एकांतिक वार्ता में ऐसे मिल सकता है मौका
जो लोग प्रेमानंद महाराज से सीधे प्रश्न पूछना चाहते हैं, उनके लिए एकांतिक वार्ता की व्यवस्था जारी है। इसके लिए पहले टोकन लेना होता है। अब टोकन वितरण की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है और दिन में लाइन लगाकर नंबर प्राप्त करना पड़ता है। जिन भक्तों को टोकन मिल जाता है, वे अगले दिन महाराज के दर्शन कर सकते हैं और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी प्राप्त कर सकते हैं।







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