चीन की पकड़ तोड़ने निकला भारत, 40 देशों की गुप्त तैयारी, दुनिया बदल सकते हैं ये खनिज

Posted by

दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अब चीन के एकाधिकार को चुनौती देने की तैयारी में जुट गई हैं। क्रिटिकल मिनरल्स यानी उन दुर्लभ खनिजों को लेकर नई रणनीति बनाई जा रही है, जिनके बिना आधुनिक तकनीक की कल्पना भी संभव नहीं है। भारत समेत करीब 30 से 40 देश मिलकर एक वैकल्पिक सप्लाई चेन तैयार करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसका मकसद चीन पर निर्भरता कम करना और भविष्य के उद्योगों को सुरक्षित बनाना है।

भारत ने बढ़ाया कदम
भारत इस मिशन में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। ऑस्ट्रेलिया, जापान, कनाडा और चिली जैसे देशों के साथ लगातार बातचीत चल रही है। हाल ही में हुई क्वाड देशों की बैठक में भी मजबूत क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन बनाने पर जोर दिया गया। माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में अरबों डॉलर का निवेश इस क्षेत्र में हो सकता है, जिससे नई वैश्विक साझेदारी का रास्ता खुलेगा।

आखिर क्यों मचा है हड़कंप?
चीन ने पिछले कुछ समय में कई महत्वपूर्ण खनिजों के निर्यात नियम सख्त कर दिए हैं। इसका असर दुनिया भर के उद्योगों पर पड़ा है। इलेक्ट्रिक वाहन, स्मार्टफोन, रक्षा उपकरण, अंतरिक्ष तकनीक और परमाणु परियोजनाएं इन खनिजों पर निर्भर हैं। चीन की इस रणनीति ने कई देशों को झटका दिया है, जिसके बाद अब वैकल्पिक व्यवस्था बनाने की कोशिश तेज हो गई है।

भारत के सामने बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के पास भी कई महत्वपूर्ण खनिजों का भंडार मौजूद है, लेकिन उनका उपयोग अभी सीमित स्तर पर हो रहा है। दूसरी तरफ चीन न केवल उत्पादन बल्कि प्रोसेसिंग और सस्ती कीमतों के मामले में भी आगे है। यही वजह है कि भारतीय उद्योगों को चीन से हटाकर दूसरे विकल्पों की ओर ले जाना आसान नहीं होगा। कीमत और उपलब्धता दोनों बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।

किन खनिजों पर टिकी दुनिया?
लिथियम, निकेल, कोबाल्ट, ग्रेफाइट, तांबा, सिलिकॉन, मैंगनीज और रेअर अर्थ एलिमेंट्स जैसे खनिज आज की तकनीकी दुनिया की रीढ़ बन चुके हैं। मोबाइल फोन से लेकर इलेक्ट्रिक कार और मिसाइल सिस्टम तक हर जगह इनका इस्तेमाल होता है। इनकी मांग लगातार बढ़ रही है और इसी वजह से इन पर नियंत्रण को लेकर वैश्विक प्रतिस्पर्धा भी तेज हो गई है।

क्या बदल सकता है भविष्य?
अगर भारत और उसके सहयोगी देश सफलतापूर्वक नई सप्लाई चेन तैयार कर लेते हैं, तो आने वाले वर्षों में चीन का दबदबा कमजोर पड़ सकता है। इससे वैश्विक बाजार में संतुलन बनेगा और भारत को भी तकनीक तथा उद्योग के क्षेत्र में बड़ी ताकत बनने का मौका मिलेगा। फिलहाल यह सिर्फ खनिजों की लड़ाई नहीं, बल्कि भविष्य की अर्थव्यवस्था और तकनीकी नेतृत्व की सबसे बड़ी जंग मानी जा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *