उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में समाजवादी पार्टी महिला सभा की जिलाध्यक्ष गार्गी सिंह पटेल पर हुए हमले ने राजनीतिक माहौल गर्मा दिया है। आरोप है कि कुछ लोगों ने उनके घर में घुसकर मारपीट की, बाल पकड़कर घसीटा और गंभीर रूप से घायल कर दिया। घटना के बाद गार्गी पटेल को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। बताया जा रहा है कि पूरी घटना घर में लगे सीसीटीवी कैमरे में भी रिकॉर्ड हुई है, जिसके आधार पर पुलिस जांच कर रही है।
पुरानी रंजिश या राजनीतिक विवाद?
जानकारी के मुताबिक घटना चंदौली के मड़िया गांव की है। आरोप है कि पूर्व ब्लॉक प्रमुख प्यारेलाल यादव के परिवार के लोगों और गार्गी पटेल के बीच विवाद हुआ, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। पुलिस को दी गई शिकायत में कई लोगों के नाम सामने आए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और वीडियो फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं।
राजभर ने अखिलेश यादव को घेरा
घटना के बाद प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी और उसके नेतृत्व पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि एक महिला नेता के साथ मारपीट की घटना पर पार्टी नेतृत्व की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। राजभर ने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर पिछड़े वर्ग और अन्य समाजों के नेताओं को सम्मान नहीं मिल रहा है। उनके बयान के बाद यह मामला सिर्फ कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।
महाभारत से की तुलना
ओम प्रकाश राजभर ने अपने बयान में इस घटना की तुलना महाभारत के प्रसंग से भी की। उन्होंने कहा कि जब किसी महिला के साथ अन्याय होता है और लोग चुप रहते हैं, तो उसके गंभीर परिणाम सामने आते हैं। राजभर ने दावा किया कि इस घटना ने पार्टी के अंदरूनी हालात को उजागर कर दिया है। उनके बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी का दौर तेज हो गया है।
CCTV फुटेज बनी जांच का आधार
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घटना के दौरान घर में लगे कैमरों में कई अहम दृश्य रिकॉर्ड हुए हैं। जांच टीम वीडियो की पड़ताल कर रही है और सभी पक्षों के बयान लिए जा रहे हैं। अधिकारियों ने कहा है कि जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इलाके में स्थिति सामान्य है, लेकिन घटना को लेकर चर्चाएं लगातार जारी हैं।
राजनीतिक असर पर सबकी नजर
चंदौली की यह घटना अब कानून व्यवस्था के साथ-साथ राजनीतिक प्रतिष्ठा का भी सवाल बन गई है। एक तरफ पुलिस जांच कर रही है, तो दूसरी ओर राजनीतिक दल इसे लेकर आमने-सामने हैं। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं इस पूरे मामले को और चर्चा में ला सकती हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सीसीटीवी में कैद तस्वीरें आखिर किस सच से पर्दा उठाएंगी।







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