मिडिल ईस्ट तनाव का असर भारत तक, पेट्रोल-डीजल हुए और महंगे, अब आगे क्या होगा ?

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अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमले के बाद मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव अब दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर डालता नजर आ रहा है। विशेषज्ञ पहले ही आशंका जता चुके थे कि इस संघर्ष का प्रभाव सिर्फ युद्ध वाले इलाकों तक सीमित नहीं रहेगा। अब भारत में भी इसकी झलक दिखाई देने लगी है। खासतौर पर तेल की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है और महंगाई एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है।

10 दिन में चौथी बढ़ोतरी
पिछले 10 दिनों में तेल कंपनियों ने चौथी बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की है। कई वर्षों तक कीमतें लगभग स्थिर रहने के बाद 15 मई 2026 से दाम बढ़ने शुरू हुए। पहले चरण में लगभग 3 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। इसके बाद अलग-अलग चरणों में दाम लगातार बढ़ते गए और अब तक पेट्रोल-डीजल की कीमतें 7 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा बढ़ चुकी हैं।

नई कीमतों ने बढ़ाई चिंता
ताजा बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर इजाफा हुआ है। इसके बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 102 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गई, जबकि डीजल भी 95 रुपये से ऊपर चला गया। लगातार बढ़ती कीमतों ने लोगों के घरेलू बजट पर असर डालना शुरू कर दिया है। रोजाना आने-जाने वाले लोगों की चिंता और बढ़ती दिखाई दे रही है।

सोशल मीडिया पर दिखा गुस्सा
नई कीमतों की जानकारी सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी तेजी से आने लगीं। कई लोगों ने महंगाई को लेकर नाराजगी जाहिर की। कुछ यूजर्स ने पुराने लोकप्रिय गीतों और मीम्स के जरिए अपनी बात रखी, जबकि कई लोगों ने बढ़ती कीमतों को लेकर चिंता जताई। महंगाई और खर्च बढ़ने को लेकर ऑनलाइन चर्चा लगातार तेज होती दिखी।

लोगों ने जताई परेशानी
कुछ शहरों में पेट्रोल पंपों पर लोगों ने भी बढ़ती कीमतों को लेकर अपनी राय दी। लोगों का कहना है कि महंगाई पहले से ही बढ़ी हुई है और ऐसे समय में ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी आम परिवारों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है। लोगों ने कहा कि रोजमर्रा के खर्च और आने-जाने की लागत भी लगातार प्रभावित हो रही है।

कच्चे तेल से जुड़ी वजह
विशेषज्ञों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी इसकी सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर चिंता के कारण वैश्विक बाजार प्रभावित हुआ है। इसका असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ रहा है और आने वाले समय में कीमतों पर सबकी नजर बनी रहने वाली है।

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