अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक हिंद महासागर में ईरान से जुड़े एक तेल टैंकर को जब्त कर लिया गया है। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान पर दबाव बढ़ा रहे हैं और सख्त चेतावनियां दे रहे हैं। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
कौन सा जहाज बना निशाना
जब्त किए गए जहाज की पहचान स्काईवेव के रूप में हुई है। अमेरिका का आरोप है कि यह जहाज ईरानी तेल की ढुलाई में शामिल था और ईरान के उस कथित नेटवर्क का हिस्सा था जिसे शैडो फ्लीट कहा जाता है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इस नेटवर्क का इस्तेमाल प्रतिबंधों से बचकर तेल निर्यात के लिए किया जाता है।
जहाज में था भारी तेल भंडार
समुद्री निगरानी आंकड़ों के अनुसार यह जहाज मलेशिया के पश्चिमी क्षेत्र से गुजरकर मलक्का स्ट्रेट पार कर चुका था। रिपोर्ट के मुताबिक जहाज में लगभग 10 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल मौजूद हो सकता है। माना जा रहा है कि यह तेल फरवरी में ईरान के खार्ग द्वीप से लादा गया था, जो देश का बड़ा तेल निर्यात केंद्र माना जाता है।
पहले भी हो चुकी कार्रवाई
यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने ईरानी जहाजों के खिलाफ कदम उठाया हो। इससे पहले अप्रैल में भी दो जहाजों पर इसी तरह की कार्रवाई की गई थी। अमेरिका का आरोप रहा है कि ईरान तेल निर्यात से मिलने वाले धन का उपयोग अपनी सैन्य गतिविधियों और क्षेत्रीय नेटवर्क को मजबूत करने में करता है।
समुद्री मार्गों पर बढ़ी निगरानी
अमेरिका पहले से ओमान की खाड़ी और अरब सागर में निगरानी बढ़ा चुका है। ईरानी बंदरगाहों की तरफ जाने वाले जहाजों पर नजर रखी जा रही है। इससे समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है क्योंकि दुनिया के कई बड़े तेल मार्ग इसी क्षेत्र से होकर गुजरते हैं।
ट्रंप के बयान से बढ़ी चिंता
राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में कहा कि वह ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के फैसले से सिर्फ एक घंटे दूर थे लेकिन खाड़ी देशों के अनुरोध पर फैसला टाल दिया गया। उन्होंने संकेत दिए कि अगर ईरान अमेरिकी शर्तें नहीं मानता तो आगे और कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। ऐसे में अब दुनिया की नजर इस बढ़ते तनाव पर टिकी हुई है।







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