उत्तर प्रदेश के करोड़ों ग्रामीणों और पंचायत चुनाव का इंतजार कर रहे नेताओं के लिए बड़ी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 12 बड़े प्रस्तावों पर मुहर लगी है। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उस फैसले की हो रही है जिसने पंचायत चुनाव की सबसे बड़ी अड़चन को लगभग खत्म कर दिया है। अब गांवों की राजनीति में एक बार फिर चुनावी माहौल तेज होता दिखाई दे रहा है।
ओबीसी आयोग पर लगी मुहर
योगी कैबिनेट ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। यह आयोग ओबीसी आरक्षण का आधार और आबादी का अनुपात तय करेगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर पंचायत सीटों का आरक्षण और रोटेशन तय होगा। खास बात यह है कि यह कदम सुप्रीम कोर्ट के ट्रिपल टेस्ट फॉर्मूले की शर्तों को पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
कैसा होगा नया आयोग
सरकार के फैसले के अनुसार यह पांच सदस्यीय आयोग होगा। इसकी कमान हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश के हाथ में रहेगी। इसके साथ पिछड़ा वर्ग से जुड़ी जानकारी रखने वाले विशेषज्ञ सदस्य भी शामिल होंगे। आयोग का कार्यकाल 6 महीने तय किया गया है। अब माना जा रहा है कि रिपोर्ट आने के बाद पंचायत चुनाव की प्रक्रिया और तेज हो सकती है।
गांव की राजनीति में बढ़ी हलचल
इस फैसले के बाद गांव से लेकर जिला स्तर तक चर्चाएं शुरू हो गई हैं। लंबे समय से पंचायत चुनाव की तारीख को लेकर असमंजस बना हुआ था। लेकिन अब राजनीतिक दलों और संभावित उम्मीदवारों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। माना जा रहा है कि चुनावी मैदान में जल्द ही हलचल और बढ़ सकती है।
मेट्रो और मेडिकल कॉलेज पर भी फैसले
कैबिनेट बैठक में सिर्फ पंचायत चुनाव ही नहीं बल्कि कई बड़े विकास प्रस्तावों पर भी मुहर लगी। लखनऊ और आगरा मेट्रो विस्तार को मंजूरी दी गई। हाथरस, बागपत और कासगंज में नए मेडिकल कॉलेज बनाने का रास्ता भी साफ किया गया। साथ ही ग्रामीण विकास और कौशल विकास परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाने का फैसला हुआ।
अब सबकी नजर अगले कदम पर
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आयोग कितनी जल्दी अपनी रिपोर्ट देता है और पंचायत चुनाव की तारीखों पर कब तस्वीर साफ होती है। लेकिन इतना तय है कि योगी सरकार के इस फैसले के बाद गांव की राजनीति में एक बार फिर चुनावी तापमान तेजी से बढ़ने लगा है। अब नजर अगले बड़े ऐलान पर टिकी है।







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