देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी लागू हो गई है। नए दाम 15 मई से लागू हुए हैं। हालांकि पहले 5 से 20 रुपये तक बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही थी, इसलिए ताजा बढ़ोतरी अपेक्षा से कम रही। इसके बावजूद लोगों के मन में चिंता खत्म नहीं हुई है और अब सवाल उठ रहा है कि क्या यह आखिरी बढ़ोतरी है या आने वाले दिनों में कीमतें और बढ़ सकती हैं।
पेट्रोल पंपों पर दिखी भीड़
कीमत बढ़ने की खबरों के बीच कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें देखने को मिलीं। कुछ जगहों पर अफवाहों के चलते लोग बड़ी मात्रा में ईंधन भरवाने पहुंच गए। रिपोर्टों के अनुसार दिल्ली, यूपी, गुजरात, बिहार और अन्य राज्यों में लोगों के बीच यह डर साफ दिखाई दिया कि आने वाले समय में ईंधन और महंगा हो सकता है।
मिडिल ईस्ट संकट बना वजह
तेल बाजार पर सबसे बड़ा असर पश्चिम एशिया के तनाव का बताया जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच हालात सामान्य नहीं हुए हैं। वहीं होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास भी तनाव जारी है। इसी रास्ते से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल कारोबार गुजरता है। ऐसे हालात में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और इसका असर भारत पर भी पड़ रहा है।
तेल कंपनियों को भारी नुकसान
रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक तेल कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद देश में लंबे समय तक पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रखे गए थे। इससे सरकारी तेल कंपनियों को रोजाना लगभग 1600 से 1700 करोड़ रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ 3 रुपये की बढ़ोतरी से पूरा घाटा भरना आसान नहीं होगा।
कैसे तय होते हैं दाम
देश में पेट्रोल और डीजल की मूल कीमत के अलावा उत्पाद शुल्क, राज्यों का वैट और परिवहन खर्च जुड़ता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 1 डॉलर बढ़ने पर भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमत लगभग 50 से 60 पैसे तक बढ़ सकती है। हाल के महीनों में कच्चा तेल काफी महंगा हुआ है।
क्या आगे भी बढ़ सकते हैं दाम
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य नहीं हुए तो तेल कंपनियां धीरे-धीरे कीमतों में और बदलाव कर सकती हैं। पहले भी रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान लगातार कई दिनों तक छोटे-छोटे अंतराल में दाम बढ़ाए गए थे। ऐसे में आने वाले समय में कीमतों में और बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।







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