एक पैर गया लेकिन हौसला नहीं टूटा, Saharanpur के बेटे ने बना दी नई पहचान

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उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के छोटे से गांव गोविंदपुर के रहने वाले जितेंद्र कुमार की कहानी संघर्ष और हिम्मत की ऐसी मिसाल है, जो हर किसी को प्रेरित कर सकती है। बचपन में हुए एक हादसे ने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी थी। महज ढाई साल की उम्र में ट्रक की चपेट में आने से उनके पैर में गंभीर चोट लगी। इलाज के दौरान संक्रमण बढ़ने पर डॉक्टरों को उनका एक पैर काटना पड़ा। परिवार के लिए यह मुश्किल वक्त था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी।

बचपन में सहा दर्द
जितेंद्र बताते हैं कि बचपन उनके लिए आसान नहीं था। जब वह अपने हमउम्र बच्चों को खेलते और दौड़ते देखते थे, तो कई बार मन दुखी हो जाता था। उन्हें लगता था कि शायद वह बाकी बच्चों की तरह सामान्य जिंदगी नहीं जी पाएंगे। लेकिन उन्होंने अपनी कमजोरी को मजबूरी नहीं बनने दिया। उन्होंने ठान लिया कि जिंदगी में कुछ ऐसा करना है जिससे लोग उन्हें उनकी कमी से नहीं, उनकी सफलता से पहचानें।

मुश्किलों से नहीं मानी हार
एक पैर होने के बावजूद जितेंद्र ने खुद को कभी कमजोर नहीं माना। उन्होंने साइकिल चलाना सीखा, खेतों में काम किया और हर चुनौती का सामना किया। धीरे-धीरे उन्होंने खुद को मानसिक रूप से इतना मजबूत बना लिया कि हालात भी उनके सामने छोटे पड़ने लगे। संघर्षों के बीच उन्होंने पढ़ाई भी जारी रखी। बीए करने के बाद उन्होंने हैदराबाद से विदेशी भाषा का कोर्स किया और आज एक बड़ी कंपनी में नौकरी भी कर रहे हैं।

जिम से बदली किस्मत
कोरोना काल के दौरान फिट रहने के लिए उन्होंने जिम जाना शुरू किया। वहीं से उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया। साथियों की प्रेरणा से उन्होंने पावरलिफ्टिंग में कदम रखा। लगातार मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने महज तीन साल में कई उपलब्धियां हासिल कर लीं। स्टेट और नेशनल स्तर की प्रतियोगिताओं में उन्होंने कई पदक जीते और ‘खेलो इंडिया’ में भी शानदार प्रदर्शन किया।

अब ओलंपिक का सपना
आज जितेंद्र सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। जिम में उनके साथ अभ्यास करने वाले लोग भी उनसे सीख लेते हैं। उनका कहना है कि जिंदगी में मुश्किलें हर किसी के सामने आती हैं, लेकिन हार मानना सबसे बड़ी गलती होती है। अब उनका सपना देश के लिए ओलंपिक में खेलना है। गोविंदपुर का यह बेटा आज साबित कर चुका है कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी कमी मंजिल के रास्ते में रुकावट नहीं बन सकती।

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