मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर वैश्विक चर्चा के केंद्र में आ गया है। फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में गिना जाता है। यहां बढ़ते सैन्य टकराव ने सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा ही नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस क्षेत्र में हलचल बढ़ने से कई देशों की चिंता बढ़ सकती है।
आसमान से हमला, समुद्र में घेराबंदी
इस संघर्ष में आधुनिक और पारंपरिक हथियारों का मिश्रण देखने को मिल रहा है। अटैक हेलिकॉप्टर कम ऊंचाई पर उड़कर तेजी से लक्ष्य को निशाना बना रहे हैं। दूसरी ओर समुद्र के भीतर बिछाई जाने वाली बारूदी सुरंगें जहाजों के लिए बड़ा खतरा बन रही हैं। लंबी दूरी तक हमला करने वाली मिसाइलें भी इस पूरे संघर्ष की अहम कड़ी बन चुकी हैं। इन हथियारों की वजह से समुद्री गतिविधियों पर असर पड़ रहा है।
समुद्री रास्तों पर बढ़ा खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार पानी के भीतर बिछाए जाने वाले विस्फोटक उपकरण जहाजों की आवाजाही के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं। ऐसे खतरों के कारण कई जहाजों को अपने रास्ते बदलने पड़ सकते हैं। समुद्री बीमा और परिवहन लागत में भी बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। अगर हालात लंबे समय तक ऐसे बने रहे तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर दिखाई दे सकता है।
मिसाइलें बनीं बड़ी ताकत
आधुनिक युद्धों में मिसाइलें सबसे प्रभावी हथियार मानी जाती हैं। लंबी दूरी से सटीक निशाना लगाने की क्षमता इन्हें बेहद खतरनाक बनाती है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्र और जमीन दोनों जगह इनका इस्तेमाल रणनीतिक बढ़त दिला सकता है। लगातार बढ़ते सैन्य तनाव के कारण क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियां भी बढ़ रही हैं।
भारत समेत दुनिया पर असर
होर्मुज से होकर दुनिया के बड़े हिस्से में तेल की आपूर्ति होती है। भारत जैसे देशों की ऊर्जा जरूरतें भी इस मार्ग से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में अगर तनाव बढ़ता है तो तेल की कीमतों पर असर पड़ सकता है। इसके साथ ही शिपिंग, व्यापार और रोजमर्रा की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। फिलहाल दुनिया की नजर इस क्षेत्र में आगे होने वाले घटनाक्रम पर टिकी हुई है।







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