UP में पंचायत चुनाव पर बड़ा खेल, 2027 से पहले गांव की सरकार पर लगा ब्रेक !

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उत्तर प्रदेश की ‘गांव की सरकार’ इन दिनों लखनऊ के राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा बनी हुई है। पंचायत चुनाव को 2027 विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा था, लेकिन योगी सरकार के नए फैसले ने पूरी तस्वीर बदल दी है। ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने से पहले ही उन्हें प्रशासक बनाए जाने के फैसले के बाद अब यह चर्चा तेज हो गई है कि पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद ही कराए जा सकते हैं। इससे प्रदेश की सियासत में नया सस्पेंस पैदा हो गया है।

प्रधानों को मिली नई जिम्मेदारी
उत्तर प्रदेश में 2021 में हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के तहत 58,189 ग्राम प्रधान चुने गए थे। इनका कार्यकाल अब समाप्त हो चुका है। चुनाव समय पर न होने के कारण सरकार ने प्रधानों को ही छह महीने के लिए प्रशासक बनाने का फैसला किया है। इससे पहले ऐसे मामलों में सहायक विकास अधिकारी को यह जिम्मेदारी दी जाती थी। हालांकि इस बार का फैसला अलग माना जा रहा है। प्रशासक बनने के बाद भी प्रधान कोई बड़ा नीतिगत फैसला नहीं ले सकेंगे। विशेष मामलों में जिलाधिकारी की मंजूरी जरूरी होगी।

OBC आयोग बना वजह
सरकार ने पंचायत चुनाव के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दी है। यह आयोग प्रदेश के सभी 75 जिलों में सर्वे कर पिछड़े वर्गों की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति की रिपोर्ट तैयार करेगा। आयोग को अपनी रिपोर्ट देने के लिए छह महीने का समय मिला है। इसके बाद सीटों का आरक्षण तय होगा और मतदाता सूची में संशोधन किया जाएगा। इन सभी प्रक्रियाओं में लंबा समय लग सकता है।

2027 के बाद चुनाव की चर्चा
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जब तक आयोग की रिपोर्ट आएगी और चुनावी प्रक्रिया पूरी होगी, तब तक प्रदेश में विधानसभा चुनाव का माहौल बन चुका होगा। ऐसे में पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव से पहले कराना मुश्किल माना जा रहा है। पंचायत चुनाव स्थानीय स्तर पर कई बार राजनीतिक समीकरण बिगाड़ देते हैं। माना जा रहा है कि सरकार विधानसभा चुनाव से पहले किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं है।

सियासत में बढ़ा घमासान
सरकार के इस फैसले के बाद विपक्ष हमलावर हो गया है। समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया है कि सरकार राजनीतिक कारणों से पंचायत चुनाव टालना चाहती है। वहीं राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि पंचायत चुनाव के नतीजों का असर विधानसभा चुनाव पर पड़ सकता था। अब सवाल यही है कि गांव की सरकार का फैसला कब होगा और क्या पंचायत चुनाव वाकई 2027 के बाद ही होंगे।

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