यूपी पंचायत चुनाव का सबसे बड़ा पेंच सुलझा, योगी सरकार के फैसले से गांवों में हलचल तेज

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उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की सरगर्मियां अब तेजी पकड़ने लगी हैं। लंबे समय से जिस ओबीसी आरक्षण को पंचायत चुनाव की सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा था उस पर अब योगी सरकार ने बड़ा कदम उठा दिया है। सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए समर्पित राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन कर दिया है। इस फैसले को चुनावी तैयारी की सबसे अहम कड़ी माना जा रहा है। माना जा रहा है कि आयोग की रिपोर्ट आने के बाद पंचायत चुनाव की प्रक्रिया और तेज हो सकती है।

क्यों जरूरी था आयोग
पिछले कुछ वर्षों में पंचायत और निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण को लेकर कानूनी विवाद सामने आए थे। अदालत ने साफ कहा था कि पिछड़े वर्गों के आरक्षण के लिए ट्रिपल टेस्ट प्रक्रिया जरूरी है। सरकार को यह साबित करना होगा कि स्थानीय निकायों में पिछड़े वर्ग की वास्तविक सामाजिक और राजनीतिक स्थिति क्या है। इसी वजह से सरकार ने अलग समर्पित आयोग बनाकर भविष्य के कानूनी विवादों से बचने की तैयारी की है।

पांच सदस्य करेंगे काम
सरकार द्वारा बनाए गए इस आयोग में पांच सदस्य शामिल किए गए हैं। आयोग की कमान इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस राम औतार सिंह को सौंपी गई है। उनके साथ रिटायर्ड अपर जिला जज बृजेश कुमार रिटायर्ड अपर जिला जज संतोष कुमार विश्वकर्मा रिटायर्ड आईएएस डॉ अरविंद कुमार चौरसिया और एसपी सिंह को सदस्य बनाया गया है। आयोग का मुख्यालय लखनऊ में रहेगा और यह टीम प्रदेशभर में सर्वे का काम करेगी।

क्या करेगा आयोग
नवगठित आयोग का मुख्य काम ग्रामीण निकायों में पिछड़े वर्ग की सामाजिक राजनीतिक और प्रशासनिक भागीदारी का अध्ययन करना होगा। आयोग यह भी पता लगाएगा कि पंचायत स्तर पर ओबीसी समुदाय की कितनी हिस्सेदारी है और किन स्तरों पर उन्हें प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। इसी आधार पर आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा और सरकार को सिफारिश सौंपेगा जिसके बाद आरक्षण का अंतिम स्वरूप तय होगा।

कब हो सकते चुनाव
आयोग के लिए छह महीने का कार्यकाल तय किया गया है। इस दौरान उसे सर्वे अध्ययन और रिपोर्ट तैयार करनी होगी। माना जा रहा है कि सरकार पंचायत चुनाव को लेकर ज्यादा देरी नहीं चाहती है। अगर आयोग समय पर रिपोर्ट देता है और कोई कानूनी अड़चन सामने नहीं आती तो पंचायत चुनाव का रास्ता काफी हद तक साफ हो सकता है।

गांवों में बढ़ी चर्चा
आयोग गठन की खबर सामने आने के बाद गांवों की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। संभावित उम्मीदवार अपनी सीटों की स्थिति समझने में जुट गए हैं। कई जिलों में लोग यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि इस बार उनकी सीट किस श्रेणी में जा सकती है। पंचायत चुनाव की तैयारियां अभी से जमीन पर दिखाई देने लगी हैं और आने वाले दिनों में राजनीतिक गतिविधियां और बढ़ सकती हैं।

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