पंजाब में SIR पर सियासी संग्राम, चुनाव से पहले क्यों बढ़ा नया विवाद?

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पंजाब में चुनाव आयोग ने 15 जून से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। अगले साल 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं और इसी वजह से इस प्रक्रिया की टाइमिंग को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। इससे पहले बिहार और पश्चिम बंगाल में भी चुनावों से पहले SIR प्रक्रिया लागू की गई थी। अब पंजाब में इसके आते ही सियासी पारा चढ़ गया है।

आप और कांग्रेस का विरोध
सत्ताधारी आम आदमी पार्टी और कांग्रेस दोनों ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। आम आदमी पार्टी का आरोप है कि संवैधानिक संस्थाओं का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए किया जा रहा है। वहीं कांग्रेस नेताओं का कहना है कि चुनाव से ठीक पहले इतनी बड़ी प्रक्रिया शुरू करना कई सवाल खड़े करता है। दोनों दल इसे राजनीतिक नजरिए से देख रहे हैं।

क्या है पूरा अभियान
SIR के तहत बूथ स्तर अधिकारी घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। नए मतदाताओं के नाम जोड़े जाएंगे और फर्जी या डबल नाम हटाए जाएंगे। चुनाव आयोग के अनुसार 25 जून से 24 जुलाई तक सत्यापन अभियान चलेगा। पंजाब में लगभग 2.14 करोड़ मतदाता हैं और अब तक करीब 83 प्रतिशत मतदाताओं की प्री-मैपिंग पूरी हो चुकी है।

चुनाव आयोग ने क्या कहा
पंजाब की मुख्य चुनाव अधिकारी अनिंदिता मित्रा ने कहा कि सभी मतदाताओं को फॉर्म भरना जरूरी होगा। अगर घर पर कोई नहीं मिलेगा तो फॉर्म छोड़ दिया जाएगा और बीएलओ तीन बार संपर्क की कोशिश करेगा। आयोग का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया वोटर सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने के लिए की जा रही है।

राजनीतिक समीकरण भी चर्चा में
इस मुद्दे ने पंजाब की राजनीति में नए सवाल भी खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों विरोध कर रहे हैं, लेकिन क्या दोनों एक साथ मैदान में उतरेंगे, इस पर चर्चा शुरू हो गई है। बिहार में कांग्रेस और सहयोगी दल साथ आए थे, जबकि पश्चिम बंगाल में अलग तस्वीर देखने को मिली थी।

केजरीवाल के सामने नई चुनौती
दिल्ली और अन्य राज्यों में चुनावी झटकों के बाद अरविंद केजरीवाल के लिए पंजाब बेहद अहम माना जा रहा है। ऐसे समय SIR का मुद्दा उनके लिए बड़ा राजनीतिक विषय बन सकता है। अब देखने वाली बात होगी कि पंजाब की राजनीति में यह विवाद सिर्फ वोटर सूची तक सीमित रहता है या चुनावी गठबंधन और नए समीकरणों तक पहुंचता है।

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